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यूपीसीएल ने की बिजली की दरें सात फीसद बढ़ाने की मांग

यूपीसीएल ने की बिजली की दरें सात फीसद बढ़ाने की मांग

देहरादून: उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) वर्ष 2018-19 के टैरिफ से संतुष्ट नहीं है। अब यूपीसीएल ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) के समक्ष याचिका दायर कर बिजली की दरें सात फीसद बढ़ाने की मांग की है। यूपीसीएल का तर्क है मौजूदा टैरिफ से घाटा बढ़ेगा।

बता दें कि वर्ष 2018-19 के लिए यूपीसीएल ने 16.57 फीसद दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। तीनों निगमों के प्रस्तावों के अनुसार 21.15 फीसद की बढ़ोत्तरी बैठ रही थी। लेकिन, यूईआरसी ने दरें बढ़ाने के बजाय औसतन 1.37 फीसद (सात पैसे) की कमी की थी। कुछ श्रेणी और स्लैब के दायरे में आने वाले उपभोक्ताओं के लिए ही दरों में मामूली इजाफा हुआ था।

अब यूपीसीएल ने याचिका दायर कर कहा है कि यूईआरसी ने लाइन लॉस 14.75 फीसद करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक यह करीब 17 फीसद है। आयोग ने इस गैप को टैरिफ में समायोजित नहीं किया, जिससे करीब 175 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही यूपीसीएल ने रॉयल्टी की बिजली खरीद में आने वाले खर्च के करीब 207 करोड़ रुपये भी टैरिफ में जोडऩे की मांग की है।

हालांकि, टैरिफ के आदेश में यूईआरसी ने इसे खारिज कर दिया था। इसके अतिरिक्त बिजली खरीद की लागत को 14 करोड़ और रुपये बढ़ाने और भवन आदि निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपये की स्वीकृति देने की भी मांग की है। कुल 439 करोड़ रुपये टैरिफ में समायोजित करने का प्रस्ताव दिया है। अगर यूईआरसी मंजूरी देता है तो इस हिसाब से बिजली दरों में 7.31 फीसद की वृद्धि होगी। अभी इस पर सुनवाई होगी और फिर यूईआरसी इस संबंध में आदेश जारी करेगा।

बता दें कि यूईआरसी के ऊर्जा के तीनों निगमों के खर्चों में कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत दी थी। निगमों ने बिजली खरीद से लेकर कर्मचारियों की भर्ती और अन्य कार्यों पर जो खर्च प्रस्तावित किया था, उसे आयोग ने अध्ययन और गणना के बाद कम अनुमोदित किया था।

ऑनलाइन बिजली बिल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क नहीं

अब बिजली बिल का डिजिटल भुगतान करने पर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क का भार नहीं पड़ेगा। अभी तक ऑनलाइन भुगतान करने पर बैंकों द्वारा सर्विस चार्ज लिया जाता था। अब यह शुल्क उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा। इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया है।

उत्तराखंड पावर कारर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) सर्विस चार्ज की रकम बैंक को देगा और फिर वार्षिक राजस्व रिपोर्ट में इसे जोड़ दिया जाएगा। इससे किसी एक उपभोक्ता पर भार नहीं पड़ेगा, बल्कि इस रकम को बिजली बिल के रूप में सभी उपभोक्ताओं से लिया लिया जाएगा।

बता दें कि राजस्व रिपोर्ट के आधार पर ही उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) बिजली दरें बढ़ाने का फैसला लेता है। बड़ी संख्या में लोगों के पास स्मार्ट फोन और इंटरनेट की सुविधा है। यानी एक क्लिक पर बिल भुगतान हो सकता है।

यूपीसीएल की वेबसाइट के अलावा पेटीएम व अन्य वॉलेट एप पर भी भुगतान की सुविधा दी गई है। लेकिन, उत्तराखंड में ऑनलाइन बिजली भुगतान की प्रगति कम है। इसका बड़ा कारण ये है कि ऑन लाइन बिजली बिल जमा करने पर बैंकों द्वारा अतिरिक्त शुल्क काटा जाता है।

केंद्र सरकार का फोकस ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने पर है। इसी के तहत अब जितना बिल होगा, उतनी धनराशि ही उपभोक्ताओं के खाते से कटेगी। अनुमान है कि सर्विस चार्ज की रकम करीब एक करोड़ होगी। पुनर्गठित त्वरित विद्युत विकास योजना (आरएपीडीआरपी) में शामिल प्रदेश के 31 शहरों व कस्बों की बात करें तो कुल बिजली भुगतान में से सिर्फ 15 फीसद ही ऑनलाइन भुगतान होता है।

यूपीसीएल के मुख्य अभियंता एवं प्रवक्ता एके सिंह ने बताया कि जब कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं कटेगा तो अधिक से अधिक उपभोक्ता डिजिटल भुगतान करेंगे। राजस्व संग्रह केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं होगी। इससे राजस्व बढ़ेगा।

रिबेट देने की भी तैयारी 

मार्च में सचिव ऊर्जा राधिका झा ने यूपीसीएल को निर्देश दिए थे कि डिजिटल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को रिबेट देने की नीति भी बनाई जाए। यूपीसीएल में इस संबंध में भी काम हो रहा है।

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