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गंगा प्रदूषण नियंत्रण के लिए होना चाहिए तकनीकी का प्रयोग: मदन कौशिक

गंगा प्रदूषण नियंत्रण के लिए होना चाहिए तकनीकी का प्रयोग: मदन कौशिक

ऋषिकेश: शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली गंगा पांच राज्यों से होकर बहती है। हर राज्य की परिस्थिति के मुताबिक गंगा स्वच्छता की दिशा में तकनीकी का प्रयोग होना चाहिए।

परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय गंगा समाधान शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कबीना मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड के भीतर गंगा पहाड़ और मैदान क्षेत्रों में होकर बहती है। हर राज्य की परिस्थिति अलग-अलग है। इसलिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण के लिए संबंधित क्षेत्र की परिस्थिति के अनुरूप तकनीकी का प्रयोग होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गंगा तट पर सीवेज नियंत्रण की योजना बहुत बनती हैं। मगर संपूर्ण नगर क्षेत्र की स्थिति के हिसाब से योजनाओं का बनना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में 13 प्रतिशत क्षेत्र में अभी सीवेज ट्रीटमेंट नहीं हो पा रहा है। हम हरिद्वार में शत-प्रतिशत सीवेज ट्रीटमेंट करेंगे।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती उन्होंने आह्वान किया कि वह देश ही नहीं बल्कि कई देशों में वहां की नदियों की स्वच्छता के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वह उत्तराखंड में निरंतर तीन माह तक गंगा स्वच्छता के लिए समय दे तो इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। कार्यक्रम संचालन साध्वी भगवती सरस्वती ने किया।

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