Share
उत्तराखंड में नहीं है हीमोफीलिया रोग के इलाज की सुविधा

उत्तराखंड में नहीं है हीमोफीलिया रोग के इलाज की सुविधा

देहरादून: उत्तराखंड में हीमोफीलिया से पीड़ित व्यक्ति के लिए इलाज की सुविधा नहीं है। सरकार हीमोफीलिया रोगी को नियमित इलाज उपलब्ध करवाने में समर्थ नहीं है। राज्य में केवल देहरादून, कोटद्वार और हल्द्वानी में ही उपचार की सीमित व्यवस्था है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को लगने वाले महंगे इंजेक्शन की खरीद में भी सरकार ज्यादा रुचि नहीं ले रही है। जिससे इस गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति प्रदेश से बाहर महंगा इलाज करवाने को मजबूर है।

हीमोफीलिया सोसाइटी देहरादून चैप्टर, राज्य सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से सहारनपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रदेश स्तरीय सेमीनार में सरकारी अस्पतालों के 50 डॉक्टरों ने प्रतिभाग किया। सेमीनार में पीजीआइ नोएडा की डॉक्टर नीता राधाकृष्णन और दिल्ली के डॉक्टर कृष्ण नागरवाल ने हीमोफीलिया के लक्षण और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

सोसाइटी के महासचिव दीपक सिंघल ने बताया कि प्रदेश में हीमोफीलिया से पीड़ित पंजीकृत रोगियों की संख्या 165 है, जबकि प्रदेशभर में करीब 180 रोगी हैं। बताया कि यह रोग अनुवांशिक भी होता है और इस रोग से ग्रसित नए रोगी भी सामने आ रहे हैं। बताया कि इस बीमारी से पीड़ित रोगी के शरीर में यदि कहीं कट जाता है तो रोगी के बहने वाले खून में थक्का नहीं बनता, जिससे लगातार खून बहता रहता है।

कई बार हीमोफीलिया रोगी को सिरदर्द सहित अन्य परेशानी होती है। कार्यक्रम में एनएचएम से वीएस टोलिया, डॉ. टीसी पंत, डॉ. जेपी शर्मा, डॉ. संजय गोयल, बसंतलाल गुप्ता, प्रवीण जोशी, डॉ. एसएस बिष्ट आदि मौजूद रहे।

Leave a Comment