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उत्तराखंड खाद्य आयोग की सुनवाई में बिना दस्तावेज पहुंचे पूर्ति निरीक्षकों को आयोग ने लगाई फटकार

उत्तराखंड खाद्य आयोग की सुनवाई में बिना दस्तावेज पहुंचे पूर्ति निरीक्षकों को आयोग ने लगाई फटकार

देहरादून। शहर में बंद मिली राशन की दुकानों के मामले में उत्तराखंड खाद्य आयोग की सुनवाई में बिना दस्तावेज पहुंचे पूर्ति निरीक्षकों को आयोग ने फटकार लगाई। आयोग ने पूर्ति निरीक्षकों से बंद मिली दुकानों के विक्रेताओं के खिलाफ विभाग कार्रवाई के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि संबंधित विक्रेताओं पर एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। लेकिन लिखित प्रमाण मांगने पर वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाए।

आयोग अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने पूर्ति निरीक्षकों को फटकार लगाते हुए 31 मई को दस्तावेजों के साथ दोबारा पेश होने का आदेश दिए हैं। सोमवार को उत्तराखंड खाद्य आयोग में राशन की दुकानें बंद मिलने के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई में पेश हुए तीन पूर्ति निरीक्षकों और 13 राशन विक्रेताओं ने अपना पक्ष रखा।
क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी केएल शाह, पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली ने आयोग को बताया कि संबंधी राशन विक्रेताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई से अवगत कराया। लेकिन कार्रवाई से संबंधित लिखित दस्तावेज वह नहीं दिखा पाए। इस पर आयोग अध्यक्ष रावत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि लिखित प्रमाण के बिना विभागीय कार्रवाई पर कैसे भरोसा किया जा सकता है।
विक्रेताओं के जवाब पर जताई हैरानी सुनवाई में राशन विक्रेताओं की ओर से रखे गए पक्ष पर आयोग अध्यक्ष रावत ने हैरानी जताई। राशन की दुकानें बंद मिलने के मामले में अधिकांश विक्रेताओं ने जवाब दिया कि वे खाना खाने गए थे। इस पर आयोग अध्यक्ष ने कहा कि सुबह 11 बजे और शाम के तीन-चार बजे कौन खाना खाने जाता है। वहीं, कुछ विक्रेताओं का कहना था कि वे बच्चों को स्कूल से लेने गए थे।
आयोग अध्यक्ष ने सख्ती से कहा कि स्पष्ट नियम है कि यदि किसी आपात स्थिति में दुकान बंद भी करनी पड़ती है तो उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी देने के लिए दुकान में नोटिस चस्पा करना अनिवार्य है। उसमें दुकानदार का फोन नंबर भी अंकित होना चाहिए।
यह था मामला 
खाद्य आयोग के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह रावत ने 29 और 30 मार्च को शहर की 18 राशन की दुकानों में छापे मारे थे। इसमें सभी दुकानें बंद मिली थी। इस पर आयोग अध्यक्ष ने डीएसओ व संबंधित विक्रेताओं को आयोग के समक्ष 20 मई को पेश होने के निर्देश दिए थे।

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