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उत्तराखंड के अनूप साह पद्मश्री से हुए सम्मानित, फोटोग्राफी में दो सौ से अधिक हासिल कर चुके राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

उत्तराखंड के अनूप साह पद्मश्री से हुए सम्मानित, फोटोग्राफी में दो सौ से अधिक हासिल कर चुके राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

नैनीताल। उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय छायाकार, पर्वतारोही अनूप साह को पद्मश्री सम्मान दिए जाने से एक बार फिर सरोवर नगरी गौरवान्वित हुर्इ है। अनूप साह फोटोग्राफी में दो सौ से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुके हैं।

जीवन के 65 बसंत से अधिक देख चुके साह को उनके पिता चंद्रलाल साह ने साल 1964 में कैमरा थमाया। उन्होंने सोचा कि उनका बेटा दुनिया में इस कैमरे से खिंचे फोटोग्राफ्स से नाम कमाएगा। साह के अंदर भी फोटोग्राफी को लेकर जुनून कमाल का था। इसी साल पिता चंद्रलाल साह ने नैनीताल पर्वतारोहण क्लब की स्थापना की तो अनूप को फोटोग्राफी के शौक को पूरा करने का अनंत रास्ता मिल गया।

मन में पर्वतारोहण का शौक था तो कालिंदी ट्रेक, नंदाकोट, ट्रेल्स पास, पिंडारी ग्लेशियर समेत आधा दर्जन से अधिक चोटियों पर तिरंगा फहराया। उन्हें अभियान का नेतृत्व करने का भी अवसर मिल गया।

अस्कोट-आराकोट अभियान में लिया हिस्सा

अनूप साह ने प्रसिद्ध पहाड़ संस्था की ओर से आयोजित अस्कोट-आराकोट अभियान में सक्रियता से हिस्सा लिया और अभियान की यादों को कैमरे में कैद किया। उन्होंने फूलों के संरक्षण के लिए फ्लोरा लीग की स्थापना की। राज्यस्तरीय जैव विविधता बोर्ड के आजीवन सदस्य साह पक्षी विशेषज्ञ भी हैं। किलबरी पंगोठ क्षेत्र के जंगल को नैना देवी बर्ड रिजर्व घोषित करने में साह के पर्यावरण प्रेम का उल्लेखनीय योगदान रहा है।

कैलास मानसरोवर यात्रा कर चुके साह के आदि कैलास और कैलास मानसरोवर के चित्र को आज भी कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से मानसरोवर यात्रियों व अपने अतिथियों को स्मृति चिह्न के रूप में भेंट किया जाता है।

दो सौ से अधिक पुरस्कार जीते

नैनीताल के छायाकार बृजमोहन जोशी बताते हैं कि साह ने दुनिया की प्रतिष्ठित फोटोग्राफी सोसाइटी ऑफ अमेरिका से संबद्ध इंटरनेशनल फोटोग्राफी काउंसिल नई दिल्ली से डायमंड ग्रेडिंग अवार्ड प्राप्त किया है। उनके द्वारा तमाम स्लाइड शो का आयोजन कराया गया है। अब तक फोटोग्राफी में दो सौ से अधिक अवार्ड जीत चुके हैं। हाल ही में साह द्वारा नैनीताल पर्वतारोहण क्लब की स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया गया। साह का प्रकृति प्रेम जगजाहिर है। उन्होंने सातताल के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ के खिलाफ आवाज बुलंद की। फिलहाल वह सीआरएसटी कॉलेज नैनीताल के प्रबंधक भी हैं।

अनूप कहते हैं कि उन्होंने पुरस्कार के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उनकी प्रतिभा को पहचान कर सम्मान दिया है। वे प्रधानमंत्री समेत पूरी सरकार के आभारी हैं। यह सम्मान उनका नहीं बल्कि तमाम प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफर, शिक्षाविदों का सम्मान है।

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