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गर्भवती को अस्पताल ले जाने के लिए 18 घंटे वाहन का किया इंतजार, गाड़ी में हुआ प्रसव

गर्भवती को अस्पताल ले जाने के लिए 18 घंटे वाहन का किया इंतजार, गाड़ी में हुआ प्रसव

उत्तरकाशी। सीमावर्ती इलाकों में बर्फीली राहें जीवन पर भारी पड़ने लगे हैं। रास्ते बंद होने के चलते उत्तरकाशी के बड़कोट इलाके में एक गर्भवती को अस्पताल ले जाने के लिए 18 घंटे तक वाहन का इंतजार करना पड़ा। इसके बाद किसी तरह वाहन पहुंचा, लेकिन महिला को अस्पताल पहुंचने से पहले ही गाड़ी में प्रसव हो गया। सुकून की बात यह कि जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं। इस सीजन में कुदरत ने उत्तराखंड में बर्फबारी के रूप में खूब नेमत बख्शी है। इनदिनों चारोंधाम के साथ ही ऊंचाई वाले इलाके बर्फ से लकदक हैं।

सीमावर्ती जिलों, खासकर उत्तरकाशी और चमोली जिले के पचास से ज्यादा गांवों की आबादी घरों में कैद होकर रह गई है। इन क्षेत्रों में रास्ते बर्फ से ढके होने की वजह से आवाजाही ठप है। संचार नेटवर्क भी ध्वस्त हो रखा है। इससे तमाम दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। उत्तरकाशी जिले में गंगा और यमुनाघाटी के तीन दर्जन से ज्यादा गांवों से खाद्यान्न संकट की खबरें में आ रही हैं। रास्ते बंद होने के चलते स्थिति इतनी विकट होती जा रही है कि बीमारों और प्रसूताओं को अस्पतालों तक पहुंचाना चुनौती बन गया है।

ऐसे में एक गर्भवती की तो जान पर बन आई थी। बड़कोट तहसील के बनास गांव निवासी आशीष लाल की पत्‍‌नी को गुजरी नौ जनवरी को प्रसव पीड़ा हुई। गर्भवती उस दिन अपने परिजनों और गांव वालों के साथ बर्फीली राह पर पांच किलोमीटर पैदल चलकर किसी तरह हनुमानचट्टी पहुंची। लेकिन, वहां उसे अस्पताल तक ले जाने के लिए वाहन नहीं मिल पाया। रास्ते में बर्फ और पाला जमा होने के कारण खतरा देखते हुए कोई भी वाहन चालक बड़कोट आने को तैयार नहीं हुआ।

परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवा 108 को भी कॉल किया, लेकिन रास्ते बंद होने की वजह से उनकी गाड़ी भी नहीं पहुंच पाई। मजबूरन परिजनों और साथ आए लोगों ने हनुमान चट्टी में एक होटल में कमरा लेकर गाड़ी के इंतजार में पूरी रात गुजारी। अगले दिन यानि 10 जनवरी को उन्होंने सुबह गर्भवती की हालत का वास्ता देकर एक वाहन चालक को बड़कोट स्थित सरकारी अस्पताल तक चलने के लिए राजी किया। यहां से करीब 15 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद गर्भवती को प्रसव पीड़ा तेज हो गई। पालीगाड़ के पास उसे गाड़ी में ही प्रसव हो गया। इसके बाद उसे किसी तरह बड़कोट अस्पताल पहुंचाया गया। अच्छी बात यह कि जच्चा-बच्चा दोनों सकुशल हैं।

जिला प्रशासन को भी सोमवार को इसका पता चला। गांव के पूर्व प्रधान विजय पंवार ने बताया कि सड़कों पर बर्फ की परत के ऊपर पाला जमने से आवाजाही में जोखिम बना हुआ है। दिन में किसी तरह वाहन चल पा रहे हैं, लेकिन अल सुबह, शाम और रात के वक्त चालक हालात देखते हुए वाहन चलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग और नेशनल हाईवे की टीम पाला प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों पर चूना नहीं डाल रही है और बर्फ भी ठीक तरीके से नहीं हटाई जा रही है।

 

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