कार्ति चिदंबरम को 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

नयी दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने उन्हें खतरे के कारण तिहाड़ जेल में अलग कोठरी उपलब्ध कराने का उनका अनुरोध भी ठुकरा दिया। अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह औरजेल में खतरे की बात भी खारिज कर दी। कार्ति का कहना था कि चूंकि पिछली संप्रग सरकार में बतौर केन्द्रीय मंत्री उनके पिता पी. चिदंबरम कई संवेदनशील मुद्दों से निपटे हैं, इसिलऐ उन्हें खतरा है।कार्ति को तीन दिन की पुलिस हिरासत समाप्त होने के बाद विशेष न्यायाधीश सुनील राणा के सामने पेश किया गया जिन्होंने उन्हें तिहाड़ जेल भेजा। सीबीआई ने अदालत से कहा कि कार्ति को हिरासत में रखकर पूछताछ करने की अब जरूरत नहीं है। चेन्नई में28 फरवरी को कार्ति की गिरफ्तार के बाद से वह 12 दिन से सीबीआई की हिरासत में थे।

विशेष न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस तथ्य को देखते हुए कि सीबीआई ने आरोपी की और पुलिस हिरासत नहीं मांगी है, आरोपी कार्ति चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है। वह24 मार्च को पेश हों।’’ अदालत ने कार्ति को जेल में अलग कोठरी के अनुरोध को भीठुकरा दिया। कार्ति की दलील थी कि उनके पिता के केन्द्रीय गृह मंत्री रहते हुए कई आतंकवादियों को तिहाड़ जेल में रखा गया, जिससे उन पर खतरा है।इस पर अदालत ने कहा कि चिदंबरम परिवार के सामाजिक औहदे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन उनके साथ अन्य आरोपियों से अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कार्ति को अपने साथ चश्मा औरजेल के डाक्टर की जांच तथा मंजूरी से बीमारी से संबंधित पर्चे पर लिखी दवाएं ले जाने की अनुमति दी। हालांकि अदालत ने शौचालय के सामान, पुस्तकें, कपडे और घर के खाने के अनुरोध को ठुकरा दिया।अदालत ने कहा कि उनकी जमानत याचिका पर15 मार्च को सुनवाई होगी। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय( ईडी) द्वारा दाखिल किए गए एक मामले में फिलहाल जेल में मौजूद कार्ति के चार्टर्ड अकाउंटेंड एस भास्कररमन ने सीबीआई के आईएनएक्स मीडिया मामले में अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया है।पिछले साल15 मई को दर्ज की गई एक प्राथमिकी के संबंध में कार्ति को ब्रिटेन से लौटने के दौरान गिरफ्तार किया गया। इसमें वर्ष 2007 में उनके पिता पी. चिदंबरम के केंद्रीय वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स मीडिया को करीब305 करोड़ रुपये की विदेशी निधि प्राप्त करने की विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा दी गई मंजूरी में हुई गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।
सीबीआई ने शुरूआत में कार्ति पर आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी की मंजूरी दिलवाने के लिए10 लाख रुपये घूस लेने का आरोप लगया था। हालांकि बाद में सीबीआई ने इन आंकड़ों को दस लाख डॉलर (वर्तमान विनिमय दर पर 6.50 करोड़ रुपये और वर्ष 2007 में 4.50 करोड़ रुपये) बताया। मामले में नए सबूत इंद्राणी मुखर्जी के बयान के रूप में सामने आए जो आईएनएक्स मीडिया (प्राइवेट) लिमिटेड की पूर्व निदेशक हैं। इंद्राणी ने 17 फरवरी को मजिस्ट्रेट के समक्ष अपराध दंड संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था। इंद्राणी के बयान के बाद ही कार्ति को गिरफ्तार किया गया।

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