बिजली आपूर्ति ठप होने से चरमराई जल व्यवस्था, जल संस्थान के पास नहीं आपात स्थिति से निपटने का प्लान

देहरादून। राजधानी में बिजली व्यवस्था क्या चरमराई कि जल संस्थान ने हर बार तरह इसे अपनी नियति मानकर हाथ-पैर छोड़ दिए। लाखों लोग पानी के लिए तरसते रहे और अधिकारी बिजली नहीं तो पानी नहीं का रटा रटाया राग अलापते रहे।

राजधानी में 272 से अधिक ट्यूबवेल की पंपिंग व्यवस्था को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। इसके कारण 90 फीसद से अधिक ट्यूबवेलों से ओवरहेड टैंकों पर पानी चढ़ाया जा रहा है। इससे यह भी साफ हो गया कि जल संस्थान के पास इस तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई प्लान ही नहीं है। वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर दून के पास महज 17 जनरेटर ही हैं।

दून की नौ लाख से अधिक की आबादी को निर्बाध पेयजल मुहैया कराने की जिम्मेदारी जल संस्था के उत्तर, दक्षिण, रायपुर व पित्थूवाला जोन के कार्यालयों पर है। सभी जोन में 104 से अधिक ओवरहेड टैंक हैं। एक ओवरहेड टैंक को खाली होने में महज ढाई घंटे का समय लगता है, जबकि उसे भरने में करीब आठ घंटे तक का समय लग जाता है।

ऐसे में समझा जा सकता है कि बिजली आपूर्ति ठप होने के बाद ओवरहेड टैंक कितनी जल्दी खाली हो गए होंगे और अधिकांश समय बिजली न होने के चलते वह कितने भर पाए होंगे। हुआ भी ऐसा ही, लगातार दो दिन तक अधिकांश समय बिजली गुल रहने के चलते ओवरहेड टैंक खाली होते चले गए और उन्हें भरने में जल संस्थान की हालत पंगु नजर आई।

राजधानी दून में बिना आपातकालीन प्लान के चल रहे जल संस्थान के कार्यालयों की यह दशा व्यवस्था पर सवाल भी खड़े करती है। देखने वाली बात है कि दून में उपजे ताजा आपातकालीन हालात से जल संस्थान के अधिकारी सबक लेकर कोई ठोस प्लान तैयार करते हैं या हमेशा की तरह पुराने ढर्रे पर कायम रहते हैं।

किराये के जनरेट पर होते हैं 1.50 करोड़ खर्च

जल संस्थान को बिजली कटौती के दौरान हर साल कम से कम 84 से अधिक जनरेटरों की जरूरत पड़ती है। हालांकि, विभागीय स्तर पर जनरेटर खरीदने की जगह अधिकारी किराये के जनरेटर मंगाने में अधिक दिलचस्पी दिखाते हैं। ऐसा नहीं है कि यह सस्ता पड़ता है, बल्कि एक जनरेटर का रोज का किराया ही चार से पांच हजार रुपये बैठता है।

इस तरह गर्मी के सीजन में ही जल संस्थान कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये तक इसी काम में खर्च कर देता है। यदि अधिकारी संजीदा होकर काम करते तो विभागीय स्तर पर जनरेटरों का इंतजाम किया जा सकता है, मगर फिलहाल ऐसी किसी कवायद पर गंभीरता के साथ काम नहीं किया जा रहा है।

पानी का हाहाकार, शिकायतों की संख्या 100 पार

सूत्रों की मानें तो बिजली व्यवस्था पटरी से उतर जाने के बाद दून में महज दो दिन के भीतर 100 से अधिक लोगों ने कस्टमर केयर पर शिकायत दर्ज कराई। इसके अलावा भी अन्य स्तर पर पानी को लेकर अधिकारियों के मोबाइल बजते रहे।

वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी रहे, जिन्हें पानी की समस्या से तो जूझना पड़ा, मगर उन्होंने जैसे-तैसे अपना गुजारा किया। दूसरी तरफ अधिकारियों ने टैंकरों से पेयजल आपूर्ति का दावा किया, मगर सच्चाई यह है कि बेहद सीमित क्षेत्रों तक ही यह व्यवस्था नजर आई।

टैंकरों के लिए भी किराये की व्यवस्था

जल संस्थान के शहर के चारों जोन में महज 12 विभागीय टैंकर हैं, जबकि गर्मियों में कम से कम 75 टैंकरों की जरूरत पड़ती है। इन टैंकरों का इंतजाम भी हो जाता है, लेकिन यह विभाग के निर्देश पर लोगों को पानी पहुंचाने से अधिक अपने हिसाब से पानी बेचने पर ध्यान देते हैं। यदि जल संस्थान जरूरत के आधे टैंकरों का भी अपने स्तर पर इंतजाम करे तो लोगों को खरीद कर पानी की जरूरत पूरी नहीं करनी पड़ेगी।

टैंकरों की खरीद के हो रहे हैं प्रयास 

जल संस्थान की महाप्रबंधक नीलिमा गर्ग के अनुसार, इस बात को स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि दो दिन पेयजल को लेकर दूनवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसे देखते हुए जल संस्थान ने टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति करने के भरसक प्रयास किए। जहां तक जनरेटरों की व्यवस्था करने की बात है, इसके लिए विभागीय स्तर पर भी खरीद के प्रयास किए जाएंगे।

वीआइपी क्षेत्रों के लिए ही वैकल्पिक इंतजाम

भले ही बिजली जाने पर आम जनता पेयजल से भी वंचित हो जाती है और पेयजल आपूर्ति को कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नही रहती, लेकिन वीआइपी क्षेत्रों में जल संस्थान 24 घंटे पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर हमेशा प्रतिबद्ध रहता है।

बात आइएएस कॉलोनी, सीएम आवास, सचिवालय, अनारवाला, राजपुर रोड, कैनाल रोड, जाखन, मसूरी रोड व कई अन्य क्षेत्रों की करें तो यहां प्राकृतिक स्रोतों से 24 घंटे पेयजल आपूर्ति होती है। स्रोत से आपूर्ति होने के कारण यहां बिजली पर भी निर्भर नहीं रहना पड़ता। क्योंकि ग्रेविटी आधारित पेयजल आपूर्ति होने के चलते इसके लिए बिजली की खास जरूरत नहीं पड़ती है।

इन क्षेत्रों में शहंशाही स्रोत से 11 एमएलडी व पुरकुल स्रोत से पांच एमएलडी मात्रा में पेयजल मिलता है। इसमें स्रोत के पानी को फिल्टर किया जाता है। हालांकि, सिर्फ बरसात के समय आपूर्ति थोड़ा प्रभावित रहती है। स्रोत में मलबा आने से पानी को बार-बार फिल्टर करने में दिक्कतें आती हैं।

वैकल्पिक व्यवस्था भी धड़ाम

बिजली जाने पर जल संस्थान की वैकल्पिक व्यवस्थाओं का भी लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। भले ही नलकूप पर लाखों की लागत का जनरेटर लगाकर विभाग पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित कराने को लेकर गंभीरता दर्शाता है, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। डालनवाला एमडीडीए कॉलोनी स्थित नलकूप को ही लीजिए, यहां कहने को भारी-भरकम जनरेटर तो लगाया गया है, लेकिन बिजली जाने पर भी यह स्टार्ट नहीं होता। कांग्रेस नेता प्रवीण त्यागी ने कहा कि इसे लेकर कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से शिकायत की गई, जनरेटर को ठीक नहीं कराया गया।

मुख्यालय ने लगाई है रोक

विभागीय सूत्र बताते हैं कि पेयजल से जुड़ी शिकायतों की रिपोर्ट साझा न करने की जल संस्थान मुख्यालय की ओर से सख्त हिदायत दी गई है। यदि कोई मीडियाकर्मी भी जानकारी मांगने का प्रयास करता है तो उसे सॉफ्टवेयर अपडेशन व कई अन्य कारण बताकर टरका दिया जाता है।

पेयजल किल्लत पर फूटा लोगों का गुस्सा

गर्मियां बढ़ते ही राजधानी में पेयजल किल्लत की होने लगी है। बदरीश कॉलोनी, बलबीर रोड में पिछले एक हफ्ते से पेयजल की किल्लत होने पर स्थानीय निवासियों ने पेयजल मुख्यालय पर मटकी फोड़ प्रदर्शन किया और जलसंस्थान महाप्रबंधक नीलिमा गर्ग का घेराव किया।

लोगों ने आरोप लगाया है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। उधर, इस मामले में भाजपा पार्षद कमली भट्ट ने भी जल संस्थान के अधिशासी अभियंता के साथ प्रभावित क्षेत्रों को दौरा किया और जल्द ही पेयजल आपूर्ति सुचारु करने की अपील की।

प्रदर्शन करते हुए महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में कई जगहों में पानी की किल्लत से लोग परेशान है। उन्होंने बताया कि बदरीश कॉलोनी, कैंट, लुनिया मोहल्ला व मंनूगंज में पिछले कई समय से पानी की किल्लत बनी हुई है।

इस संबंध में कई बार लोगों ने जलभवन में प्रदर्शन भी किया। लेकिन, समस्या का समाधान नहीं किया गया। बदरीश कॉलोनी रेजिडेस वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष धीरेद्र सिंह नेगी ने कहा कि क्षेत्र में ट्यूबवेल में खराबी होने के कारण पिछले एक सप्ताह से पेयजल संकट बना हुआ है। कई बार अधिकारियों से समस्या के समाधान की मांग की गई। लेकिन समस्या जस के तस ही बनी हुई है।

नेगी ने कहा कि गर्मियों में हर साल ट्यूबवेल की खराबी के कारण क्षेत्र में पानी की समस्या रहती है। नवादा, रायपुर क्षेत्र के पार्षद सचिन थापा, मनवीर सिंह नेगी, रतन सिंह नेगी, गणेश, कैप्टन कृष्ण थापा, कैप्टन दिलीप थापा, सुरेद्र सिंह बिष्ट, मनोज शाही, संजीत आले, विमल वालया ने बताया कि क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पेयजल संकट बना हुआ है। कई बार अधिकारियों को समस्या के समाधान की मांग करने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। महाप्रबंधक जल संस्थान नीलिमा गर्ग ने कहा कि लोगों की शिकायत पर अधिकारियों के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया गया।

पेयजल लाइन टूटने तपोवन क्षेत्र में आपूर्ति बाधित 

तपोवन क्षेत्र में अंडरग्राउंड केबल डालने के दौरान विद्युत विभाग ने तपोवन क्षेत्र में पेयजल की लाइन तोड़ दी। जिससे तपोवन के गुरु राम राय स्कूल, सहस्रधारा क्षेत्र में पानी लोगों के यहां पानी की सप्लाई नहीं हो पाई। जल संस्थान उत्तर क्षेत्र के अधिशासी अभियंता वाईएस मल्ल ने कहा कि सूचना के बाद वहां पेयजल लाइन को ठीक किया जा रहा है। शाम से क्षेत्र में आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।

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