उत्तराखण्ड

राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले राज्यपाल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है

आकाश तत्व पर आधारित राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में भारत विश्व स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। आकाश तत्व हमारे आंतरिक और बाह्य जीवन का आधार है। इस दौरान राज्यपाल ने पंचमहाभूत (आकाश, जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी) को लेकर भारत के पौराणिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक शोध से समझने पर जोर दिया।

शुक्रवार को उत्तरांचल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद राज्यपाल ने कहा कि अंतरिक्ष के रहस्यों को सुलझाने और समझने में इसरो की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसरो ने भारतीय ज्ञान-विज्ञान को पूरी दुनिया में प्रकाशित और आलोकित किया है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को तकनीकों की बहुत आवश्यकता है। पहाड़ों पर रेल का पहुंचना कुछ समय पहले सपना लगता था। लेकिन, कुछ समय  में ही पहाड़ों पर रेल पहुंचने वाली है। यह तकनीक से ही संभव हो सका है।

इसरो के परामर्शदाता शांतनु वाडेकर ने कहा कि पंचमहाभूत हमारे जीवन के लिए आवश्यक तत्व हैं। इस पर राष्ट्रीय स्तर की गोष्ठी पूरे देश में आयोजित की जा रही है। इस कड़ी में पहली प्रदर्शनी का आयोजन देहरादून में किया जा रहा है। प्रदर्शनी में केंद्र और राज्य सरकार के वैज्ञानिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्ववित्त पोषित संस्थानों के वैज्ञानिक कार्यों को प्रदर्शित किया गया है। विज्ञान भारती के संगठन महामंत्री प्रवीन रामदास ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियों से युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी।

इस दौरान सदस्य सचिव डॉ. समीर शरन, प्रो. दुर्गेश पंत, डॉ. आरपी सिंह, उत्तरांचल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जितेंद्र जोशी, उपाध्यक्ष डॉ. सतबीर सहगल, कुलपति प्रो. धर्मबुद्धि, निदेशक अभिषेक जोशी, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. श्रवण कुमार प्रो. केडी पुरोहित अध्यक्ष (विज्ञान भारती उत्तराखंड), प्रो. हेमवती नंदन, डॉ. देवी प्रसाद उनियाल, यूसर्क की निदेशक प्रो. अनीता रावत, यूसेक के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट प्रो. रचना नौटियाल आदि मौजूद थे।

स्पेस बैलून छोड़कर स्पेस बस का लिया जायजा
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एटमॉसफेरिक डाटा कलेक्शन की जानकारी देने वाले स्पेस बैलून को छोड़ा और स्पेस बस का जायजा लिया। साथ ही विभिन्न संस्थानों की ओर से लगाए गए स्टालों पर जाकर जानकारियां लीं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से संवाद भी किया। प्रदर्शनी में इसरो, परमाणु ऊर्जा आयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, डीआरडीओ, आईआरडी, नीरी, वाडिया इंस्टीट्यूट, आईआईपी, एरीज, यूकॉस्ट, यूसर्क, यूसेक, रूषा, उत्तराखंड उत्थान परिषद सहित 52 संस्थानों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र है। प्रदर्शनी सात नवंबर तक चलेगी।

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