कौशलेंद्र प्रपन्नाचारी फलाहारी महाराज पर यौन शोषण का मामला दर्ज

जयपुर। राजस्थान के अलवर जिले के एक नामचीन बाबा जगदगुर रामानुजाचार्य स्वामी कौशलेंद्र प्रपन्नाचारी फलाहारी महाराज के खिलाफ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) निवासी युवती ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है। केस डायरी अलवर पुलिस के पास पहुंच गई है। उधर, बुधवार शाम को फलाहारी बाबा बीमार हो गए और स्थानीय अस्पताल में भर्ती हो गए।

मालूम हो, फलाहारी महाराज का अलवर में दिव्य धाम आश्रम है। यहां एक वेद विद्यालय और मंदिर भी है। महाराज के भक्तों की संख्या काफी है। उनका छत्तीसगढ़ में भी आना-जाना रहता है। युवती जयपुर में विधि की पढ़ाई कर रही थी। महाराज की सिफारिश पर उसने कहीं इंटर्नशिप की और इसके लिए उसे स्कालरशिप भी मिली।

मानदेय महाराज को अर्पित करने के लिए वह 7 अगस्त में अपने माता-पिता के साथ अलवर आश्रम गई थी। तभी बाबा ने उसे अकेले बुलाया और दुष्कर्म करने लगा। इसी बीच बाबा का कोई चेला पहुंच गया। इस दौरान युवती को इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताने की धमकी दी गई। डरी-सहमी युवती भी चुपचाप लौट गई। हाल ही में गुरमीत राम रहीम का मामला सामने आने के बाद युवती की हिम्मत बढ़ी और उसने अपने परिजन को इस बारे में जानकारी दी।

राजस्थान में ही पकड़े गए छह फर्जी बाबा 
फर्जी बाबाओं के सामने आने के दौर में राजस्थान में बाड़मेर जिले की पचपदरा पुलिस ने छह फर्जी बाबाओं को दबोचा है। ये बाबा दिन में भक्तों को झांसे में लेकर उनकी किस्मत बताते थे और रात में शराब पार्टियां करते थे। पुलिस के मुताबिक, फर्जी बाबा भरतपुर जिले के सीकरी और अलवर के गोविंदगढ़ के रहने वाले हैं।

पूछताछ में उन्होंने बताया कि इस इलाके के करीब ढाई सौ परिवार इसी तरह बाबा बनकर देशभर में फैले हुए हैं और ठगी कर रहे हैं। ये अलग-अलग स्थानों पर घूमकर बड़े अधिकारियों को धार्मिक बातों में उलझाकर उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं और फिर इन फोटो को दिखाकर ग्रामीणों में बताते हैं कि वो अधिकारी भी उनका भक्त है। भक्तों को विश्वास में लेने के बाद ये उन्हें नकली नगीने, अंगूठियां देकर ठगते हैं और रात में शराब पार्टियां करते हैं।

फर्जी बाबाओं का झूठ
इन बाबाओं ने खुद को गुजरात से जूना अखाड़ा का साधु बताया। पुलिस ने जूना अखाड़े के पदाधिकारी कनाना मठ के महंत परशुराम गिरि महाराज को थाने बुलवाकर इनके बारे में पूछा तो उन्होंने इन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। बाद में इन बाबाओं ने खुद को उदासीन अखाड़े से बताया। इस पर महंत ने उदासीन अखाड़े को लेकर इनसे सवाल-जवाब किए तो फिर फर्जी साबित हुए।

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