उत्तराखंड में भी किया जाएगा लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम का संचालन

देहरादून: उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की टीम जर्मनी में मेट्रो रेल (लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम) के संचालन की तकनीक को करीब से देखकर लौट आई है। लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम (एलआरटीएस) का जर्मनी में बखूबी संचालन होता देख अधिकारियों की वह टेंशन भी दूर हो गई, जिसको लेकर माना जा रहा था कि मेट्रो के कॉरीडोर में बड़े घुमाव होने पर जमीन अधिग्रहण का मामला फंस सकता है।

उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक जितेंद्र त्यागी के अनुसार, मेट्रो रेल की डीपीआर एलआरटीएस के हिसाब से ही तैयार की गई है, लेकिन मन में सवाल उठ रहे थे कि दून से लेकर हरिद्वार व ऋषिकेश तक ट्रैक निर्माण में बड़े मोड़ कैसे बनेंगे। क्योंकि तब तक माना जा रहा था कि मेट्रो के मोड़ कम से कम 120 मीटर तक होंगे। ऐसे में जमीन अधिग्रहण काम में बाधा बन सकता था। इसीलिए मेट्रो तकनीक में दक्ष जर्मनी का दौरा करने का निर्णय लिया गया। वहां जाकर पता चला कि एलआरटीएस आधारित मेट्रो रेल 50 मीटर के मोड़ पर भी आसानी से संचालित की जा रही है। अधिकारियों ने लिए यह बात इसलिए भी राहतभरी है कि दून में मेट्रो के कॉरीडोर क्षेत्रों में सॉइल टेस्टिंग का काम भी शुरू किया जा चुका है। पहले फेज के दोनों कॉरीडोर में 200 मीटर के फासले पर यह कार्य गतिमान है।

जर्मनी के बैंक ने दिया ऋण का भरोसा 

एमडी जितेंद्र त्यागी के मुताबिक, यदि दून में जर्मनी की तर्ज पर एलआरटीएस मेट्रो का संचालन किया जाता है तो वहां का केएफडब्ल्यू बैंक ऋण भी उपलब्ध कराएगा। इस लिहाज से कॉर्पोरेशन जर्मनी से तकनीकी स्तर पर भी सहायता ले सकता है।

जून तक बनेगा मोबिलिटी प्लान 

मेट्रो परियोजना का कॉम्प्रिहेंसिव मोबलिलिटी प्लान जून तक तैयार हो जाएगा। इसके बाद राज्य कैबिनेट से पूर्व में तैयार की जा चुकी डीपीआर को स्वीकृति दिलाई जाएगी और फिर अंतिम स्वीकृति के लिए मोबिलिटी प्लान के साथ डीपीआर केंद्र के सुपुर्द की जाएगी। क्योंकि मेट्रो परियोजना की कुल लागत का 50 फीसद भुगतान की व्यवस्था केंद्र सरकार करेगी।

अलग-अलग फेज में बनेगी मेट्रो 

पहला फेज 

आइएसबीटी-कंडोली/राजपुर (लागत करीब 1720 करोड़ रुपये)

एफआरआइ-रायपुर (1612 करोड़ रुपये)

दूसरा फेज 

हरिद्वार-ऋषिकेश (4740 करोड़ रुपये)

आइएसबीटी-नेपाली फार्म (5026 करोड़ रुपये)

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