PM मोदी और योगी के बीच शुरू हुई खटपट? तस्वीर बहुत कुछ बोलती है

नयी दिल्ली। मोदी सरकार के कार्यकाल को लगभग साढ़े चार साल पूरे हो गए हैं, ऐसे में सरकार द्वारा जिन-जिन योजनाओं की शुरूआत की गई है चाहे वह केंद्र सरकार द्वारा हो या फिर बीजेपी शासित राज्यों द्वारा उसके इश्तिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर साफ-साफ देखी जा सकती है। लेकिन, पहली बार एक ऐसा विज्ञापन सामने आया जिसने सभी लोगों को चकित कर दिया, यह विज्ञापन 11 सितंबर 2018 को छपे अखबारों में देखा जा सकता है।

इस विज्ञापन में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिखाई दे रहे हैं। मगर, इसमें से प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा नदारद है। दरअसल, इस विज्ञापन का शीषर्क हैं- उत्तर प्रदेश में खुल रहे विकास के नये मार्ग।

 

अब आपको थोड़ा पीछे ले जाना चाहता हूं… साल 2014 में जब लोकसभा चुनाव होने थे, उससे कुछ वक्त पहले शुरू हुआ नरेंद्र मोदी के चेहरे का विज्ञापन जो लगभग हर अखबार की सुर्खियां भी बना। ये वहीं समय है जब सोशल मीडिया ने अचानक से उबाल मारा था और मोदी-मोदी के नारे तेज हो गए थे…तब से लेकर आज तक यह सिलसिला जारी रहा। लेकिन, ऐसा क्या हो गया जो उत्तर प्रदेश के इस विज्ञापन से नरेंद्र मोदी नदारद हैं।

राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच में कुछ-न-कुछ खटपट जरूर है और शायद यही वजह है कि जब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में उपचुनाव हुए थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार-प्रसार नहीं किया था। ऐसा माना जाता रहा है कि गोरखपुर के महंत योगी आदित्यनाथ को कोई टक्कर नहीं दे सकता क्योंकि यह सीट महंतों की है। लेकिन, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट खाली हो गई और इतिहास भी इसी के साथ पलट गया और उपचुनावों में समाजवादी पार्टी ने बाजी मार ली और सांसद बने प्रवीण कुमार निशाद।

हालांकि, मुद्दा यह नहीं कि सांसद कौन बना और कौन नहीं। आप सभी ने यह कहावत तो सुनी ही है- A picture is worth a thousand words यानी की एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है और मेरा मानना है कि तस्वीरें बहुत कुछ बयां भी करती हैं। तो सोचिए आपके मुताबिक यह तस्वीर किस दिशा की तरफ इशारा कर रही है

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