प्रदेश युवा कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही

उत्तराखंड युवा कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत गुट ने रॉबिन त्यागी को देहरादून जिला कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर गुटबाजी को और हवा दे दी है। उधर, पहले से जिला अध्यक्ष का काम देख रहे भूपेंद्र नेगी गुट ने इस नियुक्ति का विरोध किया है। उनका कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष मनमानी कर रहे हैं।

उत्तराखंड में युवक कांग्रेस के दोनों गुटों में पिछले डेढ़ साल से गहरे मतभेद चल रहे हैं। कई बार नौबत यहां तक आइ कि दून में दोनों गुट के प्रदेश सरकार के खिलाफ अलग-अलग प्रदर्शन करने से संगठन की फजीहत भी हुई थी। प्रदेश युवा कांग्रेस में करीब डेढ़ वर्ष पहले गुटबाजी तब शुरू हुई जब युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव जीतकर विक्रम रावत रावत प्रदेश अध्यक्ष बने थे। दूसरे नंबर पर रहे सुमित्तर भुल्लर कुछ दिन वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे, लेकिन वह संगठन चुनाव के सात महीने बाद ही प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिए गए।

इसका विक्रम रावत गुट ने कड़ा विरोध किया। तभी से प्रदेश स्तर पर युवा कांग्रेस दो गुटों में बंट गई। हाल ही में युकां प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत ने प्रदेश प्रभारी संजय यादव के खिलाफ भी मोर्चा खोल सरेआम आरोप लगाए कि वह मनमर्जी से नियुक्तियां कर रहे हैं। जिसकी उन्होंने शिकायत कांग्रेस हाईकमान से करने का निर्णय लिया।

उधर, संपर्क करने पर युकां प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत ने रॉबिन त्यागी की बतौर देहरादून जिला युकां कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति की पुष्टि की। कहा कि रॉबिन की नियुक्ति से युवा कांग्रेस और बेहतर ढंग से जिले में काम करेगी।

चुनाव जीतकर बना अध्यक्ष 

युकां के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र नेगी के मुताबिक, मैं युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव जीतकर जिला अध्यक्ष बना हूं। प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत संगठन को मनमानी से चला रहे हैं। उनकी ओर से जितनी भी नियुक्तियां की जा रही है उनकी शिकायत हाईकमान से की गई हैं। जल्द ही उनकी ओर से की गई नियुक्तियां रद हो जाएंगी।

प्रदेश प्रभारी ने की तीन नियुक्ति रद

युवा कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी संजय यादव ने एक बयान जारी कर युकां के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत की ओर से देहरादून, हरिद्वार व टिहरी जिले में नियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है। साथ ही इन नियुक्तियों को अनुशासनहीन करार दिया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत से तीन दिन के भीतर नियुक्तियों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। जब इस बारे में विक्रम रावत से पूछ गया तो उन्होंने किसी भी प्रकार का पत्र मिलने से इन्कार किया।

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