त्‍वचा में दर्द महसूस कराने वाला नया ऑर्गन दर्द से मुकम्‍मल निजात की जगी उम्‍मीद

त्‍वचा में दर्द महसूस कराने वाला नया ऑर्गन खोजा, दर्द से मुकम्‍मल निजात की जगी उम्‍मीद
लंदन,  शोधकर्ताओं ने त्वचा में एक नया संवेदी ऑर्गन खोजा है। यह ऑर्गन त्वचा में कोई क्षति होने पर तुरंत दर्द का अहसास कराता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज दर्दनिवारक दवाओं के विकास में महत्वपूर्ण होगी। साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार वर्तमान में हर पांच में से एक व्यक्ति शरीर के दर्द से परेशान रहता है। इसलिए नई दर्दनिवारक दवाओं की आवश्यकता है।

 

दर्द की संवेदना जरूरी
शरीर के अस्तित्व के लिए दर्द की संवेदना बहुत ही ज्यादा जरूरी होती है। यह संवेदना ही शरीर की सुरक्षा करती है। किसी ऊतक में नुकसान पहुंचने पर यह उन प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देता है जो उसे नुकसान होने से रोकता है। स्वीडन में कोरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने बताया कि त्वचा का यह संवेदी ऑर्गन ग्लिया कोशिकाओं के साथ होता है। जो सामूहिक रूप से त्वचा के भीतर एक जाल की तरह फैला होता है।

दर्द संवेदी नसों के साथ मिलकर करता है काम 
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह ऑर्गन उन प्रतिक्रियाओं जैसे- चुभन, दबाव आदि के प्रति संवेदनशील होता है और दर्द का अहसास कराता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह दर्द संवेदी ऑर्गन त्वचा में दर्द संवेदी नसों के साथ मिलकर काम करता है। जब यह ऑर्गन सक्रिय होता है तो नसों में एक प्रकार का विद्युत आवेग उत्पन्न होता है, जिसके फलस्वरूप प्रतिक्रिया होती है और दर्द महसूस होता है।

कोशिकाओं को बाहर से किया जा सकता है नियंत्रित 
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस ऑर्गन को बनाने वाली कोशिकाओं को बाहर से नियंत्रित किया जा सकता है। इनसे हमें यह पता चलता है कि ये किस तरह से किसी चुभन और दबाव का अहसास करती हैं। अपने प्रयोग में शोधकर्ताओं ने दर्द का पता लगाने वाले ऑर्गन को ब्लॉक कर दिया और पाया कि इससे दर्द की संवेदना में काफी हद तक कमी महसूस की गई।

दर्दनिवारकों के इजाद में मिलेगी मदद 
कोरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर पैटिक इर्नफोर्स ने कहा, ‘हमारे अध्ययन से यह पता चलता है कि दर्द के प्रति संवेदनशीलता केवल त्वचा के तंत्रिका तंतुओं में ही नहीं होती है। दर्द के लिए नया खोजा गया ऑर्गन भी जिम्मेदार होता है।’ उन्होंने कहा कि यह खोज शारीरिक संवेदना के कोशिकीय तंत्रों के बारे में हमारी समझ को बदल देती है। नई समझ के साथ अब और बेहतर दर्दनिवारक दवाओं का विकास किया जा सकता है।

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