सुषमा स्वराज ने इस तरह बॉलीवुड को दिलाया था अंडरवर्ल्ड से छुटकारा

RIP Sushma Swaraj: सुषमा स्वराज ने इस तरह बॉलीवुड को दिलाया था अंडरवर्ल्ड से छुटकारा...

RIP Sushma Swaraj सुषमा स्वराज का 6 अगस्त की रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वो 67 साल की थीं।

नई दिल्ली, सुषमा स्वराज के आकस्मिक निधन से पूरा देश स्तब्ध है। कुशल वक्ता, क़द्दावर नेता और सामने वाले को अपना बनाने का हुनर। उनकी शख़्सियत के हर पहलू को नम आंखों के साथ याद किया जा रहा है। सियासत की दलदली ज़मीन में सुषमा ने ख़ुद को कई दशकों तक साधे रखा। लोगों के लिए काम किया और दिल जीते। सितारों की दुनिया में भी सियासत के इस सितारे को याद करने वाले कम नहीं हैं। मगर, फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए सुषमा एक ऐसा काम कर गयीं कि मनोरंजन उद्योग उनका यह अहसान कभी नहीं उतार पाएगा।

एक वक़्त था, जब करोड़ों-अरबों का कारोबार करने वाले सिनेमा को इंडस्ट्री नहीं माना जाता है। सुषमा स्वराज पहली ऐसी नेता थीं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा की अर्से से चली आ रही इस मांग को ना सिर्फ़ समझा, बल्कि इसे पूरा करने के लिए पूरा ज़ोर लगा दिया। 1998 में वाजपेयी सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज फ़िल्म निर्माण को उद्योग का दर्ज़ा दिलाया।

1998 में आयी इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, उस दौर में 25 फीसदी से अधिक फ़िल्मों का निर्माण बाज़ार से ब्याज पर पैसा उठाकर किया जाता था। ब्याज की यह दर 36 से 40 फीसदी रहती थी। 70 फीसदी फ़िल्मों मे किसी कारोबारी का पैसा लगा होता था, जिनमें बिल्डर, ज्वैलर्स और व्यापारी शामिल थे। 5 फीसदी से कम फ़िल्में ऐसी बनती थीं, जिनमें अंडरवर्ल्ड का पैसा लगा होता था। फ़िल्म निर्माण को उद्योग का दर्ज़ा मिलने के बाद निर्माताओं को बैंकों से लोन मिलने लगे। इस बदलाव के बाद फ़िल्म निर्माण में तेज़ी आयी। कार्पोरेट कल्चर को बढ़ावा मिला और फ़िल्म निर्माण के लिए कंपनियां खुलीं। अंडरवर्ल्ड से छुटकारा मिला।

सुषमा स्वराज का यह क़दम फ़िल्म इंडस्ट्री कभी भुला नहीं सकेगी। वेटरन एक्ट्रेस शबाना आज़मी ने सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए उनके इस अहम योगदान को रेखांकित किया है। शबाना ने लिखा- सुषमा स्वराज के गुज़रने से बेहद दुखी हूं। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद हमारे संबंध सौहार्दपूर्ण थे। जब उन्होंने मुझे सूचना व प्रसारण मंत्री रहते हुए बुलाया था, तो मैं उनके नवरत्नों में से एक थी और उन्होंने फ़िल्म निर्माण को उद्योग का दर्ज़ा दिया।

वहीं जावेद अख़्तर ने कहा कि उन्होंने जिस तरह लोकसभा में अधिकारों की रक्षा के लिए जिरह की थी, उसके लिए संगीत उद्योग उनका हमेशा क़र्ज़दार रहेगा। आप दूसरों से अलग थीं। हम हमेशा आपके शुक्रगुज़ार रहेंगे।

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