सॉफ्टवेयर अपडेट होने से पहले ही टिकट मशीनें भेज दी रूटों पर

देहरादून: सांसद कोटे में बुजुर्गवारों के टिकट बन जाने का मामला थमा भी नहीं कि रोडवेज ने अधूरे सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ टिकट मशीनें रूटों पर भेज दी। दरअसल, मामला पकड़ में आने के बाद रोडवेज सभी मशीनों का सॉफ्टवेयर बदल रहा है। कंपनी को महज तीन दिन में एक हजार मशीनों को अपडेट करने की जिम्मेदारी दी गई। इसी गफलत में कंपनी ने दर्जनों मशीनों में सॉफ्टवेयर अपडेट होने से पहले ही उन्हें कईं डिपो में भेज दिया।

शुक्रवार रात से शनिवार तक मशीनों में तकनीकी गड़बड़ी के दर्जनों मामले सामने आए। शनिवार को तो परिचालकों ने मशीनें ले जाने से ही मना कर दिया। उनका दावा है कि फाइनल लिस्ट में मशीनें एक यात्री के दो-दो टिकट दर्शा रही हैं। इसके साथ ही दोनों टिकटों में गंतव्य स्थल को एक ही दर्शाया गया लेकिन किराए में अंतर है।

मसलन, एक टिकट में ऋषिकेश से दिल्ली का जनरथ का किराया 431 रुपये दर्शाया गया तो दूसरे में यही किराया 670 रुपये दर्शाया गया।

इतना ही नहीं, टिकट दिल्ली का बन रहा, लेकिन गंतव्य स्थल मंडावली दर्शा रहा। अलग-अलग डिपो में शनिवार को पूरा दिन इस तरह की शिकायतें मिलती रहीं। परिचालकों के मशीनें नहीं उठाने पर कईं डिपो में बसें तय शेड्यूल से देरी से रवाना हुईं। महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन ने बताया कि मशीनों में सॉफ्टवेयर अपडेट करने का काम चल रहा है। कुछ मशीनें अधूरे सॉफ्वेयर के साथ भेजने की शिकायत मिली हैं। इन्हें वापस मंगाया जा रहा।

स्क्रीन चेक कर दर्ज करें जानकारी 

महाप्रबंधक दीपक जैन ने सभी डिपो के परिचालकों को आदेश दिए हैं कि मशीन में स्क्रीन को अच्छी तरह से चेक करने के बाद ही जानकारी दर्ज करें। सांसद कोटे में बुजुर्गजनों के टिकट बनने के बाद रोडवेज प्रबंधन फूंक-फूंककर कदम रख रहा। ऐसे में परिचालकों को आदेश दिए गए हैं कि वे विशेष श्रेणी यात्री के पहचान पत्र का पूरा नंबर मशीन में दर्ज करें।

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